जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध,

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आगरा में मुस्लिम महापंचायत का प्रदर्शन: जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध

Jul 20, 2026
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आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में सोमवार को उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा संस्थानों को बचाने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान "हमें बुलडोजर नहीं, कलम और कॉपी चाहिए", "शिक्षा के मंदिर का सम्मान करो" और "शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ" जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को ध्वस्त करने के बजाय सरकार को कानून के दायरे में समाधान निकालना चाहिए।

प्रदेश सरपंच नदीम नूर ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के प्रदेश सरपंच नदीम नूर ने सरकार की प्रस्तावित कार्रवाई को राजनीतिक और द्वेषपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती आबादी के साथ-साथ शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता भी बढ़ रही है और ऐसे समय में विश्वविद्यालयों को बचाने की जरूरत है, न कि उन्हें खत्म करने की।

उन्होंने कहा कि रामपुर और आसपास के जिलों के हजारों छात्र इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे संस्थान को ध्वस्त करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर के योगदान का किया उल्लेख

नदीम नूर ने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और उन्होंने महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है और शैक्षणिक संस्थानों को बचाना सरकार की जिम्मेदारी है।

"साढ़े नौ साल बाद क्यों याद आई अवैध इमारतें?"

प्रदेश सरपंच ने सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार का कार्यकाल लगभग साढ़े नौ वर्ष का हो चुका है। यदि विश्वविद्यालय के भवन अवैध थे तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? चुनाव नजदीक आते ही इस मुद्दे को उठाना राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि निर्माण में कोई तकनीकी कमी है तो कानून के अनुसार जुर्माना लगाकर उसे नियमित किया जाए या फिर सरकार स्वयं विश्वविद्यालय का अधिग्रहण कर उसका संचालन करे।

"नाम बदल दीजिए, लेकिन विश्वविद्यालय मत तोड़िए"

प्रदर्शन के दौरान नदीम नूर ने कहा कि यदि सरकार को विश्वविद्यालय के नाम पर कोई आपत्ति है तो उसका नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय रखा जा सकता है, लेकिन लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संस्थान को ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और राजनीति को अलग-अलग रखा जाना चाहिए और किसी भी शैक्षणिक संस्थान को राजनीतिक विवाद का केंद्र नहीं बनाना चाहिए।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद मुस्लिम महापंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय पर किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई रोकने और मामले का शांतिपूर्ण एवं कानूनी समाधान निकालने की मांग की गई।

भूख हड़ताल और आंदोलन की चेतावनी

नदीम नूर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई की तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की तर्ज पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन सड़क से लेकर संसद तक चलाया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थान की रक्षा के लिए वे हर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे।

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