आगरा में ₹51 करोड़ के CM मॉडल स्कूलों के निर्माण पर सवाल, जंग लगी सरिया मिलने का दावा

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Agra: CM के ड्रीम प्रोजेक्ट में ये क्या हो रहा? ₹51 करोड़ के स्कूलों में जंग लगी सरिया, घटिया ईंटों ने खोली पोल!

Aug 24, 2026
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आगरा में करीब 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बीएसए के निरीक्षण में जंग लगी सरिया, मानक के अनुरूप नहीं बताई गई ईंटों, तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी और निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार जैसी खामियां सामने आने के बाद डीएम से तकनीकी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

आगरा। बच्चों को एक ही परिसर में आधुनिक और हाईटेक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठे हैं। जिले में करीब 51 करोड़ रुपये की लागत से तीन विद्यालयों का निर्माण चल रहा है। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्य की निगरानी से जुड़ी कमियां सामने आने का दावा किया गया है।

मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. राकेश सिंह ने तीनों निर्माणाधीन विद्यालयों की तकनीकी जांच कराने के लिए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी है।

कहां-कहां बन रहे हैं स्कूल?

आगरा जिले में तीन स्थानों पर इन विद्यालयों का निर्माण कराया जा रहा है।

पिनाहट के राठौटी में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल का निर्माण चल रहा है। इसी तरह एत्मादपुर के बिरखनी में भी करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल कंपोजिट स्कूल बनाया जा रहा है।

वहीं, बरौली अहीर के धमौटा में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।

तीनों परियोजनाओं की कुल लागत करीब 51 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को दी गई है।

निरीक्षण में जंग लगी सरिया मिलने का दावा

निर्माणाधीन विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठे। निरीक्षण में निर्माण स्थल पर जंग लगी सरिया मिलने और इस्तेमाल की जा रही कुछ ईंटों के मानक के अनुरूप नहीं होने की बात सामने आई।

इन विद्यालयों में भविष्य में बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ना है, इसलिए भवनों की मजबूती और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सामने आई स्थिति को गंभीर माना जा रहा है।

निर्माण स्थल पर तकनीकी स्टाफ भी नहीं मिला

निरीक्षण के दौरान केवल निर्माण सामग्री ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल उठे।

बताया गया कि निरीक्षण के समय निर्माण स्थल पर अपेक्षित तकनीकी स्टाफ मौजूद नहीं मिला। इसके अलावा श्रमिकों की संख्या की तुलना में निर्माण कार्य की प्रगति भी धीमी पाई गई।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।

DM मनीष बंसल ने दिए थे निरीक्षण के निर्देश

मामले की शुरुआत जिला टास्क फोर्स की समीक्षा से हुई। 28 जुलाई को आयोजित जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्माणाधीन विद्यालयों का निरीक्षण कराने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने टास्क फोर्स के साथ तीनों निर्माणाधीन विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण में मिली कमियों के बाद बीएसए ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजकर तीनों विद्यालयों के निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने का अनुरोध किया है।

BSA ने डीएम को भेजी रिपोर्ट

बीएसए डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, तीनों विद्यालयों की जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। जिलाधिकारी से आवश्यक निर्देश प्राप्त हुए हैं और उन्हीं के अनुरूप आगे विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है या नहीं और निर्माण एजेंसी के स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई है या नहीं।

क्यों खास हैं मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल?

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों को सामान्य सरकारी विद्यालयों से अलग आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है। इन विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, रोबोटिक्स लैब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए खेल मैदान, मिनी स्टेडियम और मल्टीपरपज हॉल भी प्रस्तावित हैं।

प्रत्येक मॉडल विद्यालय में करीब 1,500 से 3,000 विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था किए जाने की योजना है।

करोड़ों के ड्रीम प्रोजेक्ट में गुणवत्ता पर सवाल

सरकार इन विद्यालयों के माध्यम से सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में निर्माण के शुरुआती चरण में ही सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर सवाल उठना चिंता का विषय है।

फिलहाल बीएसए की रिपोर्ट के बाद मामला प्रशासन के स्तर पर पहुंच गया है। प्रस्तावित तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता से संबंधित बिंदु निरीक्षण में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की अंतिम पुष्टि सक्षम तकनीकी/प्रशासनिक जांच के बाद ही की जा सकती है।

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