आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी CM ग्रिड परियोजना के तहत आगरा में चल रहे सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। करीब ₹75 करोड़ की लागत से बसई मंडी से अमर होटल तिराहे तक लगभग 4200 मीटर लंबे CM ग्रिड का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान डिवाइडर से लिए गए कुछ सैंपल लैब टेस्ट में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात सामने आई है।
थर्ड पार्टी जांच में निर्माण कार्य से संबंधित कमियां सामने आने के बाद रिपोर्ट नगर निगम को सौंपे जाने की जानकारी है। मामला सामने आने के बाद मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त से CM ग्रिड निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
निर्माण की जिम्मेदारी डीके लवानिया कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर को दिए जाने की जानकारी है। जांच में सामने आए बिंदुओं पर कार्यदायी संस्था से जवाब मांगे जाने की बात भी सामने आई है।
लैब टेस्ट में फेल हुए डिवाइडर के सैंपल
CM ग्रिड के निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांचने के लिए डिवाइडर से निर्माण सामग्री के सैंपल लिए गए थे। थर्ड पार्टी जांच में इनमें से कुछ सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने की जानकारी सामने आई है।
सैंपल की लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और साइट पर किए जा रहे काम की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अब यह जांच का विषय है कि संबंधित हिस्से में किस सामग्री का इस्तेमाल किया गया, वह निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप थी या नहीं और गुणवत्ता में कमी मिलने की स्थिति में कितने निर्माण क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ा है।
RCC पाइप के नीचे PCC बेस को लेकर भी सवाल
मामला केवल डिवाइडर के सैंपल तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जांच के दौरान RCC पाइप के नीचे PCC बेस नहीं मिलने का मुद्दा भी सामने आया है।
इसे लेकर संबंधित कार्यदायी संस्था से जवाब मांगे जाने की जानकारी है।
यदि स्वीकृत डिजाइन या तकनीकी मानकों में RCC पाइप के नीचे PCC बेस का प्रावधान था, तो निर्माण स्थल पर उसका नहीं मिलना महत्वपूर्ण तकनीकी सवाल बन सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों, डिजाइन और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
बसई मंडी से अमर होटल तिराहे तक चल रहा निर्माण
आगरा में CM ग्रिड परियोजना के तहत बसई मंडी से अमर होटल तिराहे तक करीब 4200 मीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इस परियोजना पर करीब ₹75 करोड़ खर्च होने की जानकारी है। बड़ी धनराशि और शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में हो रहे निर्माण के कारण इसकी गुणवत्ता को लेकर सामने आए सवालों को गंभीर माना जा रहा है।
CM ग्रिड परियोजना का उद्देश्य सड़क और उससे जुड़ी शहरी सुविधाओं को बेहतर एवं व्यवस्थित स्वरूप देना है। ऐसे में निर्माण के प्रत्येक चरण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।
मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त से मांगी पूरी रिपोर्ट
निर्माण गुणवत्ता से संबंधित मामला सामने आने के बाद मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त से पूरे निर्माण कार्य की रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता, थर्ड पार्टी जांच के निष्कर्ष, लैब में भेजे गए सैंपल, तकनीकी मानकों और साइट पर किए गए कार्यों से संबंधित जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि निर्माण कार्य में मिली कमियां कितनी गंभीर हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
कार्यदायी संस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में
CM ग्रिड के इस हिस्से का निर्माण डीके लवानिया कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर द्वारा किए जाने की जानकारी है। सैंपल की रिपोर्ट और PCC बेस से संबंधित सवाल सामने आने के बाद कार्यदायी संस्था की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है।
संबंधित संस्था से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात सामने आई है। उसके जवाब और नगर निगम की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
यदि जांच में अनुबंध या निर्धारित निर्माण मानकों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार सुधारात्मक अथवा अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
निर्माण की निगरानी करने वालों पर भी सवाल
करीब ₹75 करोड़ की परियोजना में निर्माण सामग्री के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात सामने आने से केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता कब-कब जांची गई, साइट निरीक्षण कितनी नियमितता से हुआ और भुगतान से पहले कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन किस स्तर पर किया गया—ये सभी बिंदु जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप, लेकिन जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
मामला सामने आने के बाद परियोजना में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि किसी संस्था या अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित होने के लिए सक्षम जांच और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी निर्माण की गुणवत्ता से संबंधित गंभीर सवालों की ओर इशारा करती है। मंडलायुक्त द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और तकनीकी जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
CM ग्रिड की गुणवत्ता पर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजना होने और करीब ₹75 करोड़ की लागत के कारण मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि लैब में फेल हुए सैंपल वाले निर्माण हिस्से को दोबारा बनाया जाता है या नहीं, RCC पाइप के नीचे PCC बेस के मामले में क्या निष्कर्ष निकलता है और यदि निर्माण मानकों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो कार्यदायी संस्था तथा निगरानी से जुड़े जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।