आगरा। चंबल नदी में यात्रियों को लेकर जा रहा एक स्टीमर बीच नदी में खराब हो जाने से हड़कंप मच गया। स्टीमर में करीब 60 से 70 यात्री सवार बताए जा रहे हैं। नदी के तेज बहाव के बीच स्टीमर के अनियंत्रित होकर करीब 8 से 10 किलोमीटर तक बहने की बात सामने आई है। इस दौरान सवार यात्रियों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, स्टीमर नगरा घाट से केंजरा घाट की ओर जा रहा था। इसी दौरान बीच चंबल नदी में उसमें तकनीकी समस्या आ गई और स्टीमर आगे नहीं बढ़ सका।
तेज बहाव में 8-10 किलोमीटर तक बहा स्टीमर
स्टीमर के बीच नदी में खराब होने के बाद स्थिति उस समय ज्यादा चिंताजनक हो गई, जब वह चंबल के तेज बहाव के साथ बहने लगा। बताया जा रहा है कि स्टीमर करीब 8 से 10 किलोमीटर तक बह गया।
स्टीमर में बड़ी संख्या में यात्री सवार होने के कारण लोगों में दहशत फैल गई। नदी के बीच स्टीमर का नियंत्रण प्रभावित होने से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।
डीजल खत्म होने और कपड़ा फंसने की बात आई सामने
प्रारंभिक जानकारी में स्टीमर के खराब होने के पीछे डीजल खत्म होने और कपड़ा फंसने की बात सामने आई है। हालांकि स्टीमर में वास्तव में किस कारण से खराबी आई, इसकी स्पष्ट तकनीकी जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
बीच नदी में अचानक स्टीमर के रुकने और तेज धारा के साथ बहने से यात्रियों के सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो गई।
चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
बताया जा रहा है कि गंभीर परिस्थितियों के बीच स्टीमर चालक ने सूझबूझ दिखाई और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। आखिरकार स्टीमर को अटेर घाट के पास सुरक्षित तरीके से लगाया गया।
इसके बाद स्टीमर में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटनाक्रम में किसी बड़े हादसे या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई।
यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
एक साथ करीब 60 से 70 यात्रियों को लेकर चल रहे स्टीमर का बीच नदी में खराब होना कई सवाल भी खड़े करता है। खासतौर पर स्टीमर में पर्याप्त ईंधन, तकनीकी जांच, क्षमता के अनुसार यात्रियों की संख्या और आपातकालीन सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चंबल जैसी तेज बहाव वाली नदी में यात्री परिवहन के दौरान छोटी सी तकनीकी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में घटना की जांच के साथ भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए स्टीमर संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह रही कि तेज बहाव में कई किलोमीटर बहने के बावजूद स्टीमर को अटेर घाट पर सुरक्षित लगाया गया और सभी यात्री सकुशल उतर गए।