आगरा। फर्जी दस्तावेजों के सहारे कथित बोगस फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की इनवर्ड सप्लाई दिखाने और ₹1.02 करोड़ से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा व उपयोग करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की जांच के बाद थाना लोहामंडी में टेढ़ी बगिया की एमएस निहाल ट्रेडिंग कंपनी के स्वामी निहाल के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
आरोप है कि GST पंजीकरण हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन में जिस पते, किरायानामे और बिजली बिल का इस्तेमाल किया गया था, जांच के दौरान उनसे संबंधित गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। घोषित व्यापार स्थल पर फर्म का कारोबार भी नहीं मिला।
10 जुलाई 2018 को लिया था GST पंजीकरण
राज्य कर विभाग के मुताबिक ऑनलाइन GST पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा में सामने आया कि फर्म ने 10 जुलाई 2018 को पंजीकरण प्राप्त किया था। पंजीकरण के दौरान व्यापार स्थल के रूप में टेढ़ी बगिया क्षेत्र का एक दुकान का पता दर्ज किया गया था।
आवेदन में ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और एक्सिस बैंक के एक खाते की जानकारी भी दी गई थी। बाद में 21 अक्टूबर 2019 को सहायक आयुक्त राज्य कर, आगरा सेक्टर ने फर्म का पंजीकरण निरस्त कर दिया था।
जांच में पते पर नहीं मिली फर्म
मामले की जांच राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने की। विभाग के मुताबिक टीम जब पंजीकरण में घोषित व्यापार स्थल की जांच करने पहुंची तो वहां संबंधित फर्म अस्तित्व में नहीं मिली।
आरोप है कि GST पंजीकरण के लिए टेढ़ी बगिया निवासी शमशेर खान से संबंधित बिजली बिल का इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान शमशेर खान ने कथित तौर पर संबंधित किरायानामा देने से इनकार किया और फर्म तथा उसके कारोबार के बारे में जानकारी होने से भी इनकार किया।
इसके बाद ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए।
₹5.69 करोड़ की बोगस इनवर्ड सप्लाई दिखाने का आरोप
राज्य कर विभाग की जांच के मुताबिक फर्म के माध्यम से करीब ₹5.69 करोड़ की कथित बोगस इनवर्ड सप्लाई प्राप्त करना दर्शाया गया। इसके आधार पर करीब ₹1.02 करोड़ का ITC क्लेम और उपयोग किए जाने का आरोप है।
इसके अलावा फर्म की ओर से ₹5,38,86,914.60 की आउटवर्ड सप्लाई घोषित करने और इसके जरिए ₹46,59,108.28 की कथित बोगस ITC दूसरे पक्षों को पास ऑन करने का भी आरोप लगाया गया है।
इस तरह जांच का दायरा केवल फर्म के पंजीकरण में इस्तेमाल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और ITC के लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
राज्य कर उपायुक्त ने दर्ज कराई FIR
मामले में उपायुक्त राज्य कर खंड-4 जितेंद्र कुमार की ओर से थाना लोहामंडी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अब फर्म के गठन, दस्तावेजों के इस्तेमाल, बैंक खाते और कथित फर्जी लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के मुताबिक ITC से जुड़े इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं और पुलिस उनकी जांच कर रही है। लोहामंडी पुलिस भी दर्ज मामलों में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।
फिलहाल फर्जी दस्तावेज, बोगस सप्लाई और ITC से जुड़े आरोप प्राथमिकी एवं विभागीय जांच पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।