शमशाबाद/आगरा। शमशाबाद ब्लॉक क्षेत्र के धनौला मंदिर परिसर में निर्माणाधीन सरकारी पानी की टंकी की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। दावा किया जा रहा है कि टंकी के अभी चार पिलर ही खड़े किए गए हैं और उनमें दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसके अलावा निर्माण से जुड़ी सीढ़ियों में भी दरारें आने की बात कही जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही इस तरह की स्थिति सामने आना चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से किसी तकनीकी अधिकारी या इंजीनियर के माध्यम से निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
चार पिलर खड़े होते ही दरारें आने का आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक सरकारी पानी की टंकी का निर्माण अभी शुरुआती चरण में है। फिलहाल चार पिलर खड़े किए गए हैं, लेकिन इन पिलरों में दरार जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी तैयार होने के बाद इन पिलरों पर भारी भार पड़ेगा। इसलिए निर्माण के शुरुआती चरण में दिखाई दे रही दरारों की तकनीकी जांच कराना जरूरी है।
हालांकि दरारों की वास्तविक वजह क्या है और इनसे संरचना की मजबूती प्रभावित होती है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
सीढ़ियों में भी दरारें आने का दावा
ग्रामीणों ने टंकी से संबंधित निर्माणाधीन सीढ़ियों में भी दरारें दिखाई देने का दावा किया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण सामग्री अथवा निर्माण प्रक्रिया में किसी स्तर पर कमी है तो उसे अभी ठीक किया जाना चाहिए।
लोगों ने निर्माण में इस्तेमाल हो रहे सीमेंट, सरिया, कंक्रीट और अन्य सामग्री के साथ कार्य की गुणवत्ता की भी जांच कराने की मांग की है।
मंदिर परिसर में निर्माण, सुरक्षा को लेकर भी चिंता
पानी की टंकी का निर्माण धनौला मंदिर परिसर में होने के कारण यहां स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में ग्रामीणों ने निर्माण स्थल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन हिस्से को पर्याप्त रूप से सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि काम पूरा होने तक किसी अप्रिय घटना का खतरा न रहे।
ग्रामीणों का सवाल- भविष्य में हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण की गुणवत्ता की अभी जांच नहीं की गई और भविष्य में टंकी से संबंधित कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
ग्रामीणों ने ठेकेदार के साथ निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने या मानकों का उल्लंघन होने की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है। पिलरों और सीढ़ियों में दिखाई देने वाली कथित दरारों की प्रकृति तथा संरचना पर उनके प्रभाव का आकलन इंजीनियरिंग जांच के बाद ही किया जा सकता है।
संबंधित विभाग और ठेकेदार का पक्ष भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।