भ्रष्टाचार हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों और एलआईयू की गोपनीय जांच के बाद पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की बड़ी कार्रवाई; सदर से जगनेर तक पुलिस महकमे में हलचल
आगरा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में शिकायतों और कथित लापरवाही को लेकर बड़ा विभागीय एक्शन सामने आया है। नंद प्लाजा प्रकरण के करीब 24 दिन बाद थाना सदर के इंस्पेक्टर विजय विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं जगनेर क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन से जुड़ी शिकायतों के बीच इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र को भी लाइन हाजिर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा अलग-अलग मामलों में इंस्पेक्टर अपराध जगनेर विजेंद्र सिंह समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस महकमे में हुई इस कार्रवाई को पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के सख्त रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। शिकायतों की गोपनीय पड़ताल और एलआईयू की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होने से कमिश्नरेट में हलचल तेज हो गई है।
नंद प्लाजा कांड के 24 दिन बाद सदर इंस्पेक्टर पर कार्रवाई
सदर क्षेत्र का नंद प्लाजा प्रकरण पिछले कई दिनों से चर्चा में था। यहां संचालित एक कैफे में कथित तौर पर घंटों के हिसाब से केबिन किराए पर दिए जाने का मामला सामने आया था।
पुलिस की कार्रवाई के दौरान करीब डेढ़ दर्जन युवक-युवतियों के पकड़े जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले में यह सवाल भी उठे थे कि पूर्व में नोटिस दिए जाने के बावजूद कथित केबिन व्यवस्था बंद क्यों नहीं हुई और कार्रवाई में देरी कैसे हुई। चौकी स्तर पर कार्रवाई को लेकर भी आरोप सामने आए थे।
अब प्रकरण के करीब 24 दिन बाद सदर इंस्पेक्टर विजय विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किए जाने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
शिकायतों के बाद LIU ने की गोपनीय पड़ताल
जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) के स्तर से गोपनीय पड़ताल कराई गई।
दावा है कि जांच में कुछ शिकायतों और आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने के बाद रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
यह कार्रवाई केवल सदर थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। जगनेर, बमरौली कटारा, खेरागढ़, डौकी और किरावली से जुड़े मामलों और शिकायतों पर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की बात सामने आई है।
जगनेर में अवैध खनन की शिकायतों पर भी एक्शन
जगनेर क्षेत्र में कथित अवैध खनन और खनिज परिवहन को लेकर लगातार शिकायतें मिलने की बात सामने आई थी। शिकायतों की जांच के बाद जगनेर इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र को लाइन हाजिर किया गया।
इसके अलावा इंस्पेक्टर अपराध जगनेर विजेंद्र सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
अवैध खनन से संबंधित शिकायतों में पुलिसकर्मियों की भूमिका या लापरवाही के आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच किए जाने की जानकारी है। जांच पूरी होने के बाद ही व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
भ्रष्टाचार हेल्पलाइन की शिकायतों पर छह पुलिसकर्मी निलंबित
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी कार्रवाई छह पुलिसकर्मियों के निलंबन के रूप में सामने आई है। बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार हेल्पलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
इन शिकायतों को सीधे कार्रवाई का आधार बनाने के बजाय पहले उनकी गोपनीय जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हेल्पलाइन या अन्य माध्यमों से आने वाली गंभीर शिकायतों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
सदर ACP की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
नंद प्लाजा प्रकरण में थाना और चौकी स्तर की कार्रवाई के साथ सदर सर्किल की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सदर एसीपी की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
हालांकि एसीपी के खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई को आधिकारिक आदेश आने से पहले तय मानना उचित नहीं होगा। आगे जांच या वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा में क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर निगाह रहेगी।
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार का सख्त संदेश
एक साथ दो इंस्पेक्टरों को लाइन हाजिर करने और छह पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई को कमिश्नरेट में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
नंद प्लाजा प्रकरण से लेकर कथित अवैध खनन और भ्रष्टाचार हेल्पलाइन पर पहुंची शिकायतों तक अलग-अलग मामलों में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में संदेश साफ है कि गंभीर शिकायतों की जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल संबंधित मामलों में विभागीय जांच आगे बढ़ेगी। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन पुलिसकर्मियों पर कौन से आरोप प्रमाणित होते हैं और आगे क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
नोट: निलंबन या लाइन हाजिर किया जाना अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं है। संबंधित आरोपों की अंतिम स्थिति विभागीय जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बाद स्पष्ट होगी।