आगरा: गाड़ी-पानी नगर निगम का, छिड़काव पर ₹68 लाख खर्च; रोज 800 KM के दावे पर सवाल

Agra

आगरा नगर निगम में पानी छिड़काव पर उठे सवाल: गाड़ी-पानी निगम का, फिर 68 लाख का भुगतान कैसे?

Aug 13, 2026
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16 टैंकरों से दो महीने तक रोजाना 800 किमी सड़कों पर पानी छिड़काव का दावा; ₹209 प्रति किमी के हिसाब से भुगतान, शहर की सड़कों की लंबाई और टैंकरों के संचालन को लेकर उठ रहे सवाल

आगरा। नगर निगम में सड़कों पर पानी के छिड़काव के नाम पर करीब 68 लाख रुपये खर्च किए जाने का मामला सवालों के घेरे में है। दावा है कि नगर निगम के पास पानी और वाहन उपलब्ध होने के बावजूद निजी कंपनियों के माध्यम से छिड़काव कराया गया और इसके लिए लाखों रुपये का भुगतान किया गया। सबसे बड़ा सवाल दो महीने तक प्रतिदिन करीब 800 किलोमीटर सड़कों पर पानी छिड़काव किए जाने के दावे को लेकर उठ रहा है।

यह व्यवस्था पूर्व नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के कार्यकाल में किए गए करार से संबंधित बताई जा रही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार 16 टैंकरों के माध्यम से दो महीने तक शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया गया।

₹209 प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान

बताया जा रहा है कि नगर निगम की ओर से पानी के छिड़काव के लिए ₹209 प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया गया। रिकॉर्ड में प्रतिदिन करीब 800 किलोमीटर तक टैंकरों के संचालन और पानी छिड़काव का दावा किया गया है।

इसी दावे को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर प्रतिदिन इतनी बड़ी दूरी किन-किन सड़कों पर तय की गई और इसका सत्यापन किस आधार पर किया गया।

रोज 800 किलोमीटर कहां दौड़े टैंकर?

आगरा शहर के चारों कोनों की परिक्रमा से संबंधित मार्ग की लंबाई करीब 44 किलोमीटर बताई जा रही है, जबकि शहर की सड़कों और गलियों की कुल लंबाई लगभग 1100 किलोमीटर होने का दावा है।

ऐसे में अगर प्रतिदिन 800 किलोमीटर पानी छिड़काव का दावा सही है तो दो महीने के दौरान बड़ी संख्या में सड़कों पर बार-बार टैंकर चलाए गए होंगे। इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि टैंकरों ने प्रतिदिन कौन से रूट तय किए, कितनी बार एक ही सड़क पर छिड़काव हुआ और इसकी निगरानी कैसे की गई।

नगर निगम की गाड़ी और पानी, फिर निजी कंपनियों को भुगतान क्यों?

मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जब पानी नगर निगम का था और छिड़काव में निगम के वाहनों का भी इस्तेमाल होना था तो निजी कंपनियों को किस-किस मद में भुगतान किया गया।

आरोप है कि व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से ड्राइवर और सीएमसी कंपनी से संबंधित भुगतान होना था, लेकिन इसके अतिरिक्त दो टैंकर कंपनियों को भी अलग से भुगतान किया गया।

इन आरोपों और भुगतान की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि नगर निगम के संबंधित अनुबंध, बिल और भुगतान रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।

निजी कंपनियों के टैंकरों के लिए ₹290 प्रति किमी का दावा

जानकारी के अनुसार दो टैंकर कंपनियों ने अपने वाहन खरीदकर इस काम में लगाए थे। इन वाहनों के लिए ₹290 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान तय होने की बात कही जा रही है।

इसके साथ ही प्रत्येक वाहन को प्रतिदिन न्यूनतम 50 किलोमीटर का भुगतान किए जाने का भी उल्लेख सामने आया है।

ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि किन टैंकरों को ₹209 प्रति किलोमीटर और किन्हें ₹290 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया गया तथा दोनों व्यवस्थाओं के तहत कुल कितनी राशि खर्च हुई।

दिल्ली-NCR की कंपनी को भी मिला था काम

जानकारी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर की एक कंपनी को शहर में सड़क किनारे लगे पौधों और डिवाइडरों पर पानी देने का काम भी दिया गया था।

इस बीच शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर अलग-अलग एजेंसियों और निर्माण संस्थाओं की जिम्मेदारी पहले से निर्धारित होने की बात भी सामने आ रही है।

CM Grid और मेट्रो वाले मार्गों पर दूसरी संस्थाओं की जिम्मेदारी

जिन मार्गों पर CM Grid के तहत निर्माण कार्य चल रहा है, वहां पानी छिड़काव की जिम्मेदारी संबंधित कार्यदायी संस्था की बताई जा रही है।

इसी तरह मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण वाले मार्गों पर धूल नियंत्रण और पानी छिड़काव की जिम्मेदारी मेट्रो परियोजना से संबंधित एजेंसी की होती है।

इसके बावजूद एमजी रोड, माल रोड, फतेहाबाद रोड, खंदारी, प्रतापपुरा और कैंट जैसे क्षेत्रों में भी पानी का छिड़काव कराए जाने की बात सामने आई है।

नेशनल हाईवे पर NHAI की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय राजमार्ग वाले हिस्सों पर पानी छिड़काव और निर्माण से संबंधित धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी NHAI अथवा संबंधित कार्यदायी एजेंसी की होने की बात कही जा रही है।

ऐसे में नगर निगम द्वारा भुगतान किए गए रूटों का दूसरी एजेंसियों के जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों से कोई दोहराव हुआ या नहीं, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

68 लाख के खर्च का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न करीब ₹68 लाख के कथित खर्च और प्रतिदिन 800 किलोमीटर पानी छिड़काव के दावे का है। यदि नगर निगम के रिकॉर्ड में यह दूरी दर्ज है तो प्रत्येक टैंकर की तारीखवार लॉगबुक, रूट, जीपीएस रिकॉर्ड, पानी भरने के स्थान, तय की गई दूरी और भुगतान का विवरण स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि नगर निगम के अपने संसाधनों और निजी कंपनियों के संसाधनों का अलग-अलग कितना इस्तेमाल हुआ और किस मद में कितना भुगतान किया गया।

फिलहाल उपलब्ध बिंदुओं के आधार पर खर्च और टैंकरों के संचालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। NHP Bharat इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। नगर निगम अथवा संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

Tag :
#नगर_निगम
Manish Sharma
Author
Manish Sharma
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