रेलवे पार्सल बोगी से दूसरे राज्य भेजा गया था जूते और आयरन चेन समेत लाखों का माल; विजिलेंस जांच में अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आने के बाद ट्रांसपोर्टर सहित चार के खिलाफ FIR, अब संपत्तियों की भी होगी जांच
आगरा। रेलवे की पार्सल बोगी के जरिए लाखों रुपये का माल कथित रूप से बेहद कम कीमत का दर्शाकर दूसरे राज्य भेजने और जीएसटी चोरी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। विजिलेंस जांच के बाद जीएसटी विभाग के तीन अधिकारियों और एक ट्रांसपोर्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि करीब ₹42 लाख के माल की कीमत दस्तावेजों में महज ₹2 लाख दर्शाई गई और अधिकारियों को पहले से सूचना दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ विजिलेंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
2023 में शासन तक पहुंची थी शिकायत
इस मामले की शिकायत वर्ष 2023 में शासन स्तर पर की गई थी। शिकायत में वर्ष 2022 में आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से पार्सल बोगी के जरिए माल भेजने और कथित जीएसटी चोरी का मामला उठाया गया था।
शिकायतकर्ता रवि गांधी ने बताया था कि उन्होंने 29 सितंबर और 7 अक्टूबर 2022 को सचल दल पंचम के तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह और वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय को इसकी जानकारी दी थी।
आरोप था कि आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर एक रेलवे मालवाहक पार्सल बोगी बुक कराई गई है और इसके माध्यम से जीएसटी चोरी कर माल को अवध एक्सप्रेस से बांद्रा टर्मिनल रेलवे स्टेशन भेजा जा रहा है। इस काम में ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी की भूमिका होने का आरोप लगाया गया था।
अधिकारियों ने बताया बोगी खाली, रेलवे रिकॉर्ड में मिली अलग जानकारी
शिकायत के बाद सचल दल पंचम के सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय और सतीश चंद्र आगरा फोर्ट स्टेशन पहुंचे थे।
आरोप है कि अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को बताया कि संबंधित बोगी खाली है। हालांकि विजिलेंस जांच के दौरान रेलवे के अभिलेखों से अलग जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित बोगी को 29 सितंबर 2022 को सुबह 9:15 बजे से रात 11:40 बजे तक लोडिंग के लिए लगाया गया था।
शिकायतकर्ता ने इसके बाद भी कई बार अधिकारियों को फोन कर बोगी में माल लोड किए जाने की जानकारी देने का दावा किया। आरोप है कि इसके बावजूद सचल दल की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और माल आगरा फोर्ट से बांद्रा टर्मिनल के लिए रवाना हो गया।
₹42 लाख का माल सिर्फ ₹2 लाख का दिखाने का आरोप
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात माल की घोषित कीमत को लेकर सामने आई। आरोप है कि ट्रांसपोर्टर की ओर से रेलवे पार्सल बोगी से भेजे गए माल की कीमत महज ₹2 लाख दर्शाई गई थी।
वहीं विजिलेंस और जीएसटी विभाग से संबंधित जांच में इस माल की वास्तविक अनुमानित कीमत करीब ₹42 से ₹45 लाख प्रति बोगी आंकी गई।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि माल की वास्तविक कीमत कम दिखाकर दूसरे राज्य भेजा गया, जिससे जीएसटी चोरी हुई और सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा।
300 बॉक्स जूते और 100 बोरी आयरन चेन
रेलवे के प्रपत्रों के आधार पर जांच में माल की मात्रा का भी आकलन किया गया। जानकारी के मुताबिक संबंधित खेप में करीब 300 बॉक्स जूते और 100 बोरी आयरन चेन शामिल थीं।
बताया गया कि एक बॉक्स में करीब 40 जोड़ी जूते थे। इस हिसाब से 300 बॉक्स में करीब 12 हजार जोड़ी जूते थे।
जांच में प्रति जोड़ी जूते की कीमत लगभग ₹250 के आधार पर आकलित किए जाने पर अकेले जूतों की कीमत करीब ₹30 लाख बैठी।
इसी तरह प्रत्येक बोरी में लगभग 60 किलोग्राम आयरन चेन होने की जानकारी सामने आई। 100 बोरियों में मौजूद आयरन चेन की अनुमानित कीमत करीब ₹12 लाख आंकी गई।
इस आधार पर जूते और आयरन चेन की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹42 लाख होने की बात सामने आई। इसके अलावा माल भाड़े के रूप में करीब ₹90 हजार तक भुगतान किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
ब्रश और पेठा भेजे जाने की भी बात
मामले से जुड़ी जानकारी में रेलवे पार्सल के जरिए जूते और आयरन चेन के अलावा ब्रश और पेठा जैसे सामान भेजे जाने की बात भी सामने आई है। विजिलेंस अब पूरे रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर माल की आवाजाही और कथित कर चोरी की कड़ियों की जांच कर रही है।
सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप
विजिलेंस जांच में अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। आरोप है कि जीएसटी चोरी से संबंधित सूचना मिलने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
जांच में अधिकारियों और ट्रांसपोर्टर के बीच कथित मिलीभगत की बात सामने आने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अलग-अलग जिलों में तैनात हैं आरोपी अधिकारी
जानकारी के अनुसार आरोपी सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह मूल रूप से गाजीपुर, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय प्रतापगढ़ और सतीश चंद्र अमरोहा के रहने वाले बताए गए हैं।
मामले के समय इनकी तैनाती आगरा में थी, जबकि वर्तमान में इनके दूसरे जिलों में तैनात होने की जानकारी है।
वहीं ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी आगरा के ज्योति नगर, इंद्रपुरम क्षेत्र का निवासी बताया गया है और वह लंबे समय से ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा हुआ है।
धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में FIR
पुलिस अधीक्षक विजिलेंस आलोक शर्मा के मुताबिक निरीक्षक अशोक कुमार की ओर से सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित धाराएं लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
अब आरोपियों की संपत्तियों की भी होगी जांच
FIR दर्ज होने के बाद विजिलेंस अब मामले से संबंधित साक्ष्य जुटाएगी। रेलवे रिकॉर्ड, माल की बुकिंग से जुड़े दस्तावेज, जीएसटी रिकॉर्ड और अन्य संबंधित अभिलेख जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक विजिलेंस के अनुसार मामले में साक्ष्य संकलित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही आरोपियों की संपत्तियों की जांच भी की जाएगी।
विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद यह मामला केवल कथित जीएसटी चोरी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि सरकारी अधिकारियों की भूमिका और संभावित भ्रष्टाचार की जांच भी इसके केंद्र में आ गई है।
नोट: खबर में उल्लिखित अधिकारियों और ट्रांसपोर्टर के संबंध में लगाए गए आरोप विजिलेंस जांच और दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जानकारी पर आधारित हैं। आरोप न्यायालय में सिद्ध होना शेष है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।