रिश्तेदार की सरकारी नौकरी लगवाने का दिया था भरोसा, करीब ढाई महीने तक कराया काम; रायबरेली पहुंचने पर सामने आया मामला
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर 16 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि रिश्तेदारों ने बेटे-बेटी को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम ली और बेटी को फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए करीब ढाई महीने तक सरकारी कार्यालय में काम भी कराया। मामला सामने आने के बाद लोहामंडी थाने में भाजपा के खेरागढ़ विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई विजयपाल सिंह कुशवाह और उनकी पत्नी मंजू कुशवाह समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
20 लाख से शुरू हुई बात, 16 लाख में तय हुआ सौदा
लोहामंडी के तोता का ताल निवासी अमर सिंह कुशवाह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जनवरी 2026 में उनकी बेटी वैशाली और बेटे पीयूष को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में दोनों की नौकरी लगवाने के लिए 20 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में सौदा 16 लाख रुपये में तय हुआ।
अमर सिंह का आरोप है कि उन्होंने बेटी की शादी के लिए रखे जेवर गिरवी रखकर और रिश्तेदारों से उधार लेकर रकम जुटाई। 15 जनवरी को 7 लाख रुपये और 25 जनवरी को 6.50 लाख रुपये नकद दिए गए। शिकायत के मुताबिक, नौकरी लगवाने के नाम पर परिवार से अन्य रकम भी ली गई।
लखनऊ ले जाकर दिया नियुक्ति पत्र
शिकायत के अनुसार, 21 जनवरी को राजेश कुमार बघेल वैशाली को लखनऊ के इंदिरा भवन ले गया। वहां उसे नियुक्ति पत्र दिया गया। अगले दिन उसकी ड्यूटी हाथरस जिला पंचायत कार्यालय में लगा दी गई। परिवार को भरोसा हो गया कि बेटी की सरकारी नौकरी लग गई है।
वैशाली ने करीब ढाई महीने तक वहां काम किया। हालांकि इस दौरान उसे वेतन नहीं मिला। जब परिवार ने वेतन को लेकर सवाल किया तो कथित तौर पर उसे बताया गया कि उसका तबादला रायबरेली कर दिया गया है।
रायबरेली पहुंचते ही खुला फर्जीवाड़ा
आरोप है कि 24 मार्च को वैशाली को लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक केंद्र पर ले जाकर सर्विस बुक तैयार कराई गई। इसके बाद 10 अप्रैल को जब वह रायबरेली पहुंची तो वहां उसके नाम से कोई नौकरी ही नहीं थी।
इसके बाद परिवार को पता चला कि नियुक्ति पत्र और नौकरी से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नौकरी के नाम पर परिवार के साथ धोखाधड़ी की गई।
बेटे को RBI में नौकरी दिलाने के नाम पर भी रकम लेने का आरोप
अमर सिंह ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे पीयूष को भारतीय रिजर्व बैंक में नौकरी दिलाने का भी भरोसा दिया गया था। इसके लिए 2.10 लाख रुपये नकद और 40 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से लिए जाने का आरोप है।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस को कथित फर्जी नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां भी उपलब्ध कराई हैं।
विधायक के भाई-भाभी समेत छह नामजद
पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर मंजू कुशवाह, उनके पति विजयपाल सिंह कुशवाह, राजेश कुमार बघेल, योगेंद्र प्रताप सिंह बघेल, सुदेश कुमार और कुमारी अनुज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश और धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
विजयपाल सिंह कुशवाह आगरा के खेरागढ़ से भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई बताए गए हैं। पीड़ित अमर सिंह ने यह भी कहा है कि आरोपी उनके रिश्तेदार हैं और इसी वजह से उन्हें भरोसा था कि उनके साथ धोखा नहीं होगा।
आरोपी पक्ष ने भी खुद को बताया ठगी का शिकार
मामले में आरोपी पक्ष ने आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। रिपोर्टों के मुताबिक, विजयपाल सिंह कुशवाह और उनकी पत्नी मंजू का कहना है कि मुख्य आरोपी बताए जा रहे राजेश कुमार बघेल और उसके साथियों ने उनके साथ भी एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है।
आरोपी पक्ष का दावा है कि वीडियो में पैसों के लेन-देन को जिस तरह से पेश किया जा रहा है, वह कथित ठगी की रकम वापस मांगने से जुड़ा है। यानी आरोपी पक्ष खुद को भी इस पूरे मामले में पीड़ित बता रहा है।
पुलिस ने शुरू की जांच
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह के अनुसार, शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध पुलिस शिकायत और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सामने आए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।