पिनाहट/आगरा। थाना पिनाहट क्षेत्र की ग्राम पंचायत रैपुरा भदौरिया स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल में तीन गायों की मौत का मामला सामने आया है। गोवंश की देखरेख में कथित लापरवाही को लेकर आश्रय स्थल का संचालन करने वाली संस्था स्नोबॉल फैसिलिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ पिनाहट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गोवंश को पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं कराया गया और आश्रय स्थल में जलभराव व कीचड़ जैसी समस्याएं बनी हुई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चार दिन से भूसा-दाना और हरा चारा नहीं देने का आरोप
एफआईआर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक संस्था की ओर से पिछले करीब चार दिनों से गोवंश को भूसा, दाना और हरा चारा उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके कारण पशुओं के कमजोर होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उचित भोजन और देखरेख नहीं मिलने के कारण आश्रय स्थल में तीन गायों की मौत हो गई। हालांकि गायों की मृत्यु के वास्तविक कारणों का निर्धारण जांच और संबंधित पशु चिकित्सकीय निष्कर्षों के आधार पर होगा।
गोशाला में जलभराव और कीचड़ का भी आरोप
शिकायत में गोवंश आश्रय स्थल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि परिसर में जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी हुई थी और पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
ऐसी स्थिति में पशुओं के स्वास्थ्य और संक्रमण के खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है।
निरीक्षण के दौरान रजिस्टर नहीं दिखाने का आरोप
एफआईआर के अनुसार निरीक्षण के दौरान संस्था से आश्रय स्थल के संचालन से जुड़े आवश्यक अभिलेख और रजिस्टर मांगे गए, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि व्यवस्था में सुधार के लिए पूर्व में कई बार निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।
पिनाहट थाने में मुकदमा, जांच शुरू
मामले में पिनाहट पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में आश्रय स्थल की व्यवस्था, पशुओं को दिए जाने वाले चारे, संबंधित रिकॉर्ड और तीन गायों की मृत्यु की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
नोट: संस्था की लापरवाही, चार दिन तक चारा नहीं दिए जाने और उसके कारण गायों की मृत्यु होने संबंधी बातें एफआईआर/शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।