बाह/आगरा। थाना बाह क्षेत्र में 22 वर्षीय युवती के कथित अपहरण का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि 10 सितंबर 2026 को बाह स्थित कैनरा बैंक के पास से एक युवक अपने साथी के साथ युवती को हथियार दिखाकर कार में जबरन बैठाकर ले गया। मामले में अब अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं परिजनों ने शुरुआती पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए युवती की जल्द और सकुशल बरामदगी की मांग की है।
छोटे भाई के साथ बैंक जा रही थी युवती
परिजनों के मुताबिक युवती अपने छोटे भाई के साथ बैंक जा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान संजय उर्फ संजू पंडित, निवासी महावीर नगर, पक्की तिलैया, बाह और एक अन्य व्यक्ति वहां पहुंचे।
परिजनों की शिकायत के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर हथियार दिखाकर युवती और उसके भाई को एक स्विफ्ट कार में जबरन बैठा लिया। कुछ दूरी पर युवती के भाई को कार से उतार दिया गया। इसके बाद भाई ने घर पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी।
पहले गुमशुदगी दर्ज करने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन शुरुआत में मामले को गुमशुदगी के रूप में दर्ज किया गया। इसके बाद परिवार ने एसीपी बाह, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और अन्य उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
परिजनों का कहना है कि शिकायतों के बाद मामले में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से मुकदमे में लगाई गई धाराओं और अब तक की जांच के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पूछताछ के बाद पिता-भाई को छोड़ने पर भी सवाल
परिजनों का आरोप है कि नामजद आरोपी के पिता और भाई को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्हें उसी रात छोड़ दिया गया। परिवार का दावा है कि इसके बाद आरोपी के परिजन घर पर ताला लगाकर चले गए।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के सात दिन बाद भी युवती के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। परिवार ने पुलिस से मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए युवती को सकुशल बरामद करने की मांग की है।
पिस्टल के साथ फोटो वायरल होने का दावा
परिजनों के मुताबिक नामजद युवक की हथियार के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। हालांकि तस्वीर में दिखाई दे रहे हथियार की वैधता, तस्वीर की प्रामाणिकता और उसका इस कथित अपहरण की घटना से कोई संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में लगाए गए अपहरण और हथियार दिखाने समेत सभी आरोप फिलहाल शिकायत और परिजनों के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।