भारत-चीन समेत विदेशी Rescue Teams से नेपाल ने क्यों किया इनकार?

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475 मौतों के बाद भी नेपाल ने भारत-चीन की मदद ठुकराई, सामने आई चौंकाने वाली वजह

Aug 28, 2026
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काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई बाढ़ और मलबे के सैलाब ने घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी महत्वपूर्ण सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल सरकार ने भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों की ओर से विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश को स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि नेपाली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।

नोट: शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। 28 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 469 तक पहुंच चुकी थी। इसलिए पुराने आंकड़े 475 मौतों या 600 से अधिक लापता लोगों को अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।

विदेशी रेस्क्यू टीमों को नेपाल ने क्यों लौटाया?

नेपाल सरकार ने भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत कई देशों के उन प्रस्तावों को ठुकराया है, जिनमें अपनी सर्च एंड रेस्क्यू टीमें नेपाल भेजने की पेशकश की गई थी।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार को कई देशों और संगठनों से आधिकारिक तथा अनौपचारिक अनुरोध मिले थे। हालांकि नेपाल ने जवाब दिया कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां इस अभियान को संभालने में सक्षम हैं।

भारत की ओर से भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए NDRF टीम भेजने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन नेपाल ने इस अनुरोध को भी स्वीकार नहीं किया।

2015 के भूकंप का अनुभव बना बड़ी वजह

विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने के पीछे नेपाल के अधिकारियों ने 2015 के विनाशकारी भूकंप के अनुभव का हवाला दिया है।

उस समय बड़ी संख्या में विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंची थीं। अधिकारियों के अनुसार, कई टीमों के एक साथ पहुंचने से उनके बीच समन्वय और प्रबंधन में समस्याएं पैदा हुई थीं। कुछ जगहों पर अलग-अलग टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा जैसी स्थिति भी बनी थी।

इसी पुराने अनुभव को देखते हुए इस बार नेपाली सेना और पुलिस की सिफारिश पर घरेलू सुरक्षा एजेंसियों के नेतृत्व में ही रेस्क्यू अभियान चलाने का फैसला किया गया है।

नेपाल ने अपनाया 'वन-डोर सिस्टम'

विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने के बावजूद नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।

सरकार ने राहत सामग्री और आर्थिक सहायता के लिए 'वन-डोर सिस्टम' लागू किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से आने वाली राहत को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के जरिए प्रभावित लोगों तक पहुंचाना और राहत वितरण में गड़बड़ी को रोकना है।

सरकार का कहना है कि तत्काल प्राथमिकता लोगों की जान बचाने, खोज एवं बचाव, निकासी और राहत कार्यों की है। आगे पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए जरूरत के मुताबिक सहायता मांगी जाएगी।

सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता

नेपाल के विदेश मंत्रालय के 27 अगस्त के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 33 देशों के 596 विदेशी नागरिक अभी भी लापता बताए गए थे। इनमें भारत के 167 नागरिक शामिल हैं। आधिकारिक सूची में अमेरिका के 66, यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51, ब्रिटेन के 33, ऑस्ट्रेलिया के 35 और कनाडा के 25 नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।

हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में बदलाव हुआ है, क्योंकि राहत एवं बचाव दल लगातार लोगों का पता लगा रहे हैं और रिकॉर्ड अपडेट किए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने भी नेपाल में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रयास तेज किए हैं।

नेपाल ने विदेशी नागरिकों के लिए बनाया इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों के लिए Emergency Response Team (ERT) बनाई है। यह टीम प्रभावित विदेशी नागरिकों के संबंध में खोज एवं बचाव, जानकारी के सत्यापन और कांसुलर सहायता के बीच समन्वय करेगी।

विदेशी नागरिकों के परिजन और संबंधित दूतावास इस व्यवस्था के जरिए जानकारी हासिल कर सकते हैं।

अब नई बाढ़ का खतरा भी मंडरा रहा

पहली बाढ़ की तबाही से नेपाल अभी उबर भी नहीं पाया था कि नेपाल-चीन सीमा के पास बने एक झीलनुमा जलाशय के बढ़ते पानी ने नई चिंता पैदा कर दी।

28 अगस्त को सीमा क्षेत्र में बने एक लैंडस्लाइड-बैरियर झील के ओवरफ्लो होने की खबर सामने आई। इससे बोटेकोशी नदी में पानी बढ़ने और प्रभावित इलाकों में दोबारा बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया। खतरे को देखते हुए कुछ इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोके गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, झील में पानी की मात्रा 2.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक हो गई थी और उसका पानी बोटेकोशी नदी की ओर बहने लगा।

नेपाल में लगातार जारी है राहत और बचाव अभियान

नेपाल सरकार के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाएं राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों को चिकित्सा सहायता देने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी है।

नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी के लिए विशेष इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्यवस्था भी शुरू की है और लोगों से अपुष्ट सूचनाएं प्रसारित न करने की अपील की है।

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