लखीमपुर खीरी। खमरिया पंडित स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर ₹100 से ₹200 तक की अवैध वसूली की जा रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी प्रमाण पत्र तैयार होने में करीब 25 दिन का समय बताता है, लेकिन कई मामलों में यह अवधि बीतने के बाद भी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जाता।
प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिलने के कारण नवजात बच्चों के माता-पिता को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिलने से बच्चों का आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। इसके लिए परिवारों को बार-बार सीएचसी और संबंधित कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर पैसे देने वाले लोगों के प्रमाण पत्र संबंधी काम अपेक्षाकृत जल्दी किए जाते हैं, जबकि बिना अतिरिक्त पैसा दिए प्रक्रिया पूरी करने वाले लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। हालांकि ₹100 से ₹200 की अवैध वसूली और पैसे देने पर काम जल्दी होने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सीएचसी अधीक्षक की भूमिका पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
मामले को लेकर ग्रामीणों ने सीएचसी प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली की जा रही है तो इसकी विभागीय स्तर पर जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उसका प्रमाण पत्र कब तक जारी होगा और इसके लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया एवं शुल्क क्या है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रमाण पत्र के नाम पर कथित धन वसूली, आवेदन लंबित रखने और लोगों को बार-बार कार्यालय बुलाने संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में यदि अवैध वसूली या विभागीय लापरवाही के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
फिलहाल ये आरोप स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों पर आधारित हैं। संबंधित कर्मचारी और सीएचसी प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।