मंडी धनौरा ब्लॉक में सर्वे कर तैयार की जा रही कार्ययोजना, स्वीकृति के लिए डीएम कार्यालय भेजा जाएगा प्रस्ताव
मंडी धनौरा, अमरोहा। विकास खंड मंडी धनौरा की 16 ग्राम पंचायतों में जलभराव की समस्या दूर करने और पानी की निकासी सुचारु बनाने के लिए नालों का निर्माण प्रस्तावित है। इन कार्यों पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना है। ब्लॉक प्रशासन गांवों में सर्वे कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसके बाद प्रस्ताव स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी कार्यालय भेजा जाएगा।
जलभराव से ग्रामीणों को होती है परेशानी
बरसात के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्य मार्गों पर पानी भरने और गंदगी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। उचित जलनिकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर लंबे समय तक पानी जमा रहता है। दी गई जानकारी के अनुसार, कई गांवों में यह समस्या लगभग छह महीने तक बनी रहती है।
इस समस्या के समाधान के लिए गांवों की जरूरत और जलनिकासी की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर नालों के निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
जरूरत के अनुसार तय होंगे निर्माण कार्य
खंड विकास अधिकारी प्रतिभा अग्रवाल ने बताया कि विकास खंड की 16 ग्राम पंचायतों में पानी की निकासी बेहतर बनाने के लिए नालों का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार नाला निर्माण पर आठ से दस लाख रुपये तक की धनराशि खर्च होगी।
प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत लागत और स्वरूप सर्वे तथा कार्ययोजना के आधार पर तय किए जाएंगे। पूरी योजना के लिए करीब 50 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है।
इन गांवों को किया गया शामिल
खंड विकास अधिकारी के अनुसार, चिन्हित ग्राम पंचायतों में आजमपुर, निलीखेड़ी, पपसरा बंगर, मंढईया, अहरौला माफी, मोहद्दीनपुर, ताजपुर, मोहदम्मदपुर पट्टी, कुआखेड़ा और वासीपुर सहित अन्य गांव शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नाला निर्माण उन्हीं ग्राम पंचायतों में कराया जाएगा, जहां गंदे पानी की निकासी तालाब तक करने की सुविधा उपलब्ध है। इससे नालों के जरिए पानी को निर्धारित निकासी स्थल तक पहुंचाया जा सकेगा।
स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी कार्ययोजना
सर्वे और विस्तृत कार्ययोजना तैयार होने के बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय को भेजा जाएगा। फिलहाल योजना तैयारी के चरण में है। स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्तावित निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। नालों का निर्माण होने से मुख्य मार्गों पर जलभराव कम होने और ग्रामीणों का आवागमन सुगम होने की उम्मीद है।