श्राद्ध पक्ष की पूर्णिमा पर स्वर्गीय टीकमदास पुनमचदजी का स्मरण

Jalore

रानीवाड़ा: स्वर्गीय टीकमदास पुनमचदजी लधड की 34वीं पुण्यतिथि, परिवार ने श्रद्धापूर्वक किया पितृ स्मरण

Sep 26, 2026
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रानीवाड़ा। श्राद्ध पक्ष की पूर्णिमा के अवसर पर दैनिक नवज्योति के रानीवाड़ा ब्यूरो चीफ मदन माहेश्वरी के पिताश्री स्वर्गीय टीकमदास पुनमचदजी लधड की 34वीं पुण्यतिथि पर परिवारजनों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार ने उनके जीवन, विचारों और दिए गए संस्कारों को याद करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की तथा उनकी आत्मा की शांति और सद्गति के लिए प्रार्थना की।

परिवार के सदस्यों ने कहा कि उनके निधन को 34 वर्ष बीत जाने के बावजूद उनकी स्मृतियां और दिए गए संस्कार आज भी परिवार के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

34 वर्ष बाद भी परिवार के बीच जीवंत हैं स्मृतियां

स्वर्गीय टीकमदासजी को संसार से विदा हुए 34 वर्ष बीत चुके हैं। इस लंबे समय में परिवार की कई पीढ़ियां आगे बढ़ीं और जीवन में अनेक परिवर्तन आए, लेकिन उनके साथ बिताए पल और उनकी सीख आज भी परिवार के सदस्यों की स्मृतियों में जीवंत हैं।

परिजनों ने कहा कि परिवार के सुख-दुख और विशेष अवसरों पर उनकी कमी महसूस होती है, लेकिन उनके विचार और जीवन मूल्य आज भी प्रेरणा और मार्गदर्शन देते हैं।

संस्कारों को बताया पिता की सबसे बड़ी विरासत

परिवार के अनुसार स्वर्गीय टीकमदासजी की सबसे महत्वपूर्ण विरासत उनके द्वारा दिए गए संस्कार और जीवन मूल्य हैं।

उन्होंने परिवार को आपसी एकता, रिश्तों के प्रति सम्मान, बड़ों का आदर और परिवार को साथ लेकर चलने की सीख दी। परिवार के सदस्यों का कहना है कि यही संस्कार आज अगली पीढ़ियों तक पहुंच रहे हैं।

श्राद्ध पक्ष की पूर्णिमा पर किया पितृ स्मरण

श्राद्ध पक्ष की पूर्णिमा पर पुण्यतिथि होने के कारण परिवार ने इस अवसर पर अपने पितृ का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। परिजनों ने तर्पण और प्रार्थना के माध्यम से स्वर्गीय टीकमदासजी को नमन किया।

इस दौरान उनके साथ बिताए गए समय, परिवार के प्रति उनके समर्पण और उनके द्वारा दी गई सीख को याद किया गया।

दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

34वीं पुण्यतिथि पर परिवारजनों ने स्वर्गीय टीकमदास पुनमचदजी लधड की आत्मा की शांति और सद्गति की कामना की।

परिवार का कहना है कि किसी पिता की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके दिखाए मार्ग पर चलना, उनके संस्कारों को जीवन में अपनाना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

पुण्यतिथि का यह अवसर परिवार के लिए केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि उस व्यक्तित्व और संस्कारों को नमन करने का अवसर बना, जिन्होंने परिवार की नींव को मजबूत किया।

Jitendra Dahiya
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Jitendra Dahiya
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