पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 के सरपंच चुनाव में प्रच

Jalore

पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 के सरपंच चुनाव में प्रचार का पर्याप्त समय नहीं देना अन्याय — राठौड़

Oct 5, 2026
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बाड़मेर/जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 का कार्यक्रम घोषित होने के बाद पंच और सरपंच प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह मिलने और मतदान के बीच बेहद कम समय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए पंच एवं सरपंच प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद कम से कम 10 दिन का प्रचार समय देने की मांग की है।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक पंच और सरपंच के चुनाव चार चरणों में होंगे। पहले चरण में नामांकन, जांच और चुनाव चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया 24 अक्टूबर को पूरी होगी और मतदान अगले दिन 25 अक्टूबर को होगा। इसी तरह दूसरे चरण में 30 अक्टूबर को प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 5 नवंबर के बाद 6 नवंबर और चौथे चरण में 15 नवंबर के बाद 16 नवंबर को मतदान निर्धारित है। यानी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह मिलने के अगले ही दिन मतदान होना है। Navbharat Times

आजाद सिंह राठौड़ ने इसी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरपंच ग्रामीण लोकतंत्र में जनता से सीधे चुना जाने वाला महत्वपूर्ण प्रतिनिधि है। उनका तर्क है कि चुनाव चिन्ह मिलने और मतदान के बीच इतना कम समय होने से प्रत्याशी के लिए अपने गांव और ढाणियों में मतदाताओं तक चुनाव चिन्ह की जानकारी पहुंचाना मुश्किल होगा।

राठौड़ ने कहा कि सीमित संसाधनों वाले प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी समस्या प्रचार सामग्री तैयार कराने और उसे मतदाताओं तक पहुंचाने की होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद कुछ ही घंटों में कोई सामान्य प्रत्याशी पर्चे और पोस्टर कैसे तैयार कराएगा और दूर-दराज की ढाणियों तक पहुंचकर मतदाताओं को अपना चुनाव चिन्ह कैसे बताएगा।

उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव चिन्ह का विशेष महत्व होता है। ऐसे में चुनाव चिन्ह आवंटन और मतदान के बीच पर्याप्त समय नहीं होने से न केवल प्रत्याशियों के प्रचार का अवसर सीमित होगा, बल्कि मतदाताओं को भी प्रत्याशी और उसके चुनाव चिन्ह के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए कम समय मिलेगा।

राठौड़ ने हाल के नगरीय निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अप्रत्यक्ष निर्वाचन वाले अध्यक्ष, सभापति और महापौर जैसे पदों की चुनाव प्रक्रिया के लिए अलग समय दिया जा सकता है, तो सीधे जनता द्वारा चुने जाने वाले सरपंच प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह मिलने के बाद पर्याप्त प्रचार समय देने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा कराने का आरोप भी लगाया। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है; उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम अपने आप इस आरोप को प्रमाणित नहीं करता। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार पंच-सरपंच चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे और मतदान बैलेट पेपर से होगा। Navbharat Times

राठौड़ ने कहा कि यदि चुनाव आयोग का उद्देश्य चुनाव में धनबल और अनावश्यक खर्च को नियंत्रित करना है तो चुनावी खर्च पर सख्ती की जानी चाहिए। उनके अनुसार प्रचार अवधि कम करने का सबसे अधिक प्रभाव उन सामान्य और सीमित संसाधनों वाले प्रत्याशियों पर पड़ेगा, जिनके पास पहले से बड़ा संगठन या प्रचार तंत्र उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से मांग की कि घोषित चुनाव कार्यक्रम की समीक्षा कर चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद पंच और सरपंच प्रत्याशियों को कम से कम 10 दिन का प्रचार समय दिया जाए, ताकि सभी प्रत्याशियों को मतदाताओं तक अपनी बात और चुनाव चिन्ह पहुंचाने का समान अवसर मिल सके।

राठौड़ ने कहा, “धनबल रोकना है तो धनबल पर लगाम लगाइए, लोकतांत्रिक प्रचार पर नहीं।” उन्होंने निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी प्रत्याशियों को समान अवसर देने और मतदाताओं को प्रत्याशियों के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त करने का समय दिए जाने की मांग की है।

Shrawan Luked
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Shrawan Luked
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