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ब्रेकिंग न्यूज़ | जिस पुलिस से बच्चे डरते थे, आज उसी पुलिस को पुकार रहे हैं!

Nov 5, 2026
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सोहागपुर/नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश। पुलिस का नाम सुनते ही बच्चों के मन में अक्सर डर या संकोच की भावना पैदा हो जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील में पुलिस और बच्चों के बीच विश्वास बढ़ाने की एक सकारात्मक पहल सामने आई है। सोहागपुर थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी बच्चों के मन से पुलिस का डर दूर करने और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाने के उद्देश्य से लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं।

इस पहल के तहत थाना प्रभारी स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से बातचीत करते हैं और उन्हें आवश्यकता पड़ने पर पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसका सकारात्मक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एक बच्चा ऑटो चालक की कथित अनुचित टिप्पणी से परेशान होकर स्वयं पुलिस थाने पहुंच गया और अपनी समस्या बताई।

बच्चों के मन से पुलिस का डर दूर करने की पहल

सोहागपुर थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी ने बच्चों के बीच पुलिस की सकारात्मक और सहयोगी छवि विकसित करने के उद्देश्य से संवाद की पहल की है।

इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों को यह विश्वास दिलाना है कि पुलिस उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए मौजूद है।

थाना प्रभारी स्थानीय विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं से मुलाकात करते हैं और उनसे मित्रवत वातावरण में बातचीत करते हैं।

इस दौरान बच्चों को समझाया जाता है कि किसी भी प्रकार की परेशानी, डर या असुरक्षा महसूस होने पर वे बिना संकोच पुलिस से सहायता मांग सकते हैं।

पिपरिया से सोहागपुर तक जारी रखा अभियान

जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी इससे पहले पिपरिया के मंगलवारा थाना क्षेत्र में पदस्थ थे।

वहां भी उन्होंने बच्चों के साथ संवाद और विश्वास बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए थे।

सोहागपुर स्थानांतरण के बाद उन्होंने इस पहल को जारी रखा है।

उनका प्रयास है कि बच्चों और पुलिस के बीच ऐसा वातावरण विकसित हो, जिसमें बच्चे अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें।

स्कूलों में जाकर बच्चों को देते हैं संपर्क नंबर

थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को पुलिस की भूमिका और सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी देते हैं।

इस दौरान वे विद्यार्थियों को अपना मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चे उनसे संपर्क कर सकें।

बच्चों को भरोसा दिलाया जाता है कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें परेशान करे या वे किसी परिस्थिति में असुरक्षित महसूस करें, तो पुलिस से सहायता लेने में डरने की जरूरत नहीं है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को पुलिस से संवाद करने के लिए सहज बनाना है।

ऑटो चालक की कथित टिप्पणी से परेशान बच्चा पहुंचा थाने

बच्चों और पुलिस के बीच बढ़ते विश्वास का एक उदाहरण उस समय सामने आया, जब एक बच्चा ऑटो चालक की कथित अनुचित टिप्पणी से परेशान होकर स्वयं सोहागपुर थाने पहुंच गया।

बच्चे ने पुलिस के सामने अपनी समस्या रखी और सहायता मांगी।

कम उम्र के बच्चे का बिना डरे थाने पहुंचना इस पहल का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।

हालांकि, ऑटो चालक द्वारा कथित रूप से की गई टिप्पणी, शिकायत की विस्तृत परिस्थितियों और इस मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।

बच्चे की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

थाने में बच्चों ने सुनाईं कविताएं और पहाड़े

सोहागपुर थाने में बच्चों के साथ मित्रवत वातावरण में बातचीत भी की गई।

इस दौरान बच्चों ने कविताएं सुनाईं और पहाड़े सुनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

पुलिसकर्मियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके साथ सहज संवाद स्थापित किया।

इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को यह अनुभव कराना रहा कि पुलिस थाना केवल अपराध संबंधी कार्रवाई का स्थान नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त करने का माध्यम भी है।

पेन, पेंसिल और ट्रॉफी देकर किया सम्मानित

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए पुलिस की ओर से उन्हें पेन, पेंसिल और ट्रॉफी प्रदान की गईं।

थाने में आयोजित इस संवाद के दौरान बच्चों की भागीदारी की सराहना की गई।

थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी के अनुसार, इस पहल की वास्तविक उपलब्धि पुरस्कार वितरण नहीं, बल्कि बच्चों का पुलिस के प्रति बढ़ता विश्वास है।

उनका मानना है कि यदि बच्चे किसी परेशानी के समय बिना डरे पुलिस से संपर्क करते हैं, तो यह समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बच्चों की सुरक्षा में संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका

बच्चों की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए विश्वास और संवाद भी आवश्यक हैं।

कई बार बच्चे डर, झिझक या संकोच के कारण अपनी समस्याएं समय पर नहीं बता पाते।

ऐसी परिस्थितियों में पुलिस और बच्चों के बीच नियमित संवाद उन्हें अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

सोहागपुर पुलिस की इस पहल में बच्चों को अपनी परेशानी बताने और सहायता मांगने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जा रहा है।

पुलिस की मित्रवत छवि विकसित करने का प्रयास

थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी की पहल पुलिस और समाज के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने के प्रयास के रूप में सामने आई है।

स्कूलों में जाकर बच्चों से बातचीत करना, उन्हें संपर्क नंबर देना और थाने में सहज वातावरण उपलब्ध कराना इस पहल के प्रमुख हिस्से हैं।

इससे बच्चों को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि पुलिस उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए उपलब्ध है।

अन्य थाना क्षेत्रों के लिए भी बन सकती है उदाहरण

सोहागपुर में बच्चों और पुलिस के बीच संवाद बढ़ाने की यह पहल अन्य क्षेत्रों में भी अपनाई जा सकने वाली एक उपयोगी अवधारणा है।

यदि विद्यालयों और पुलिस के बीच नियमित संवाद स्थापित हो, तो बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने और उन्हें सहायता प्राप्त करने के तरीकों से परिचित कराने में मदद मिल सकती है।

साथ ही, बच्चों को अपने अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य विश्वसनीय वयस्कों से भी परेशानी साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।

सोहागपुर में थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी का प्रयास बच्चों के मन में पुलिस के प्रति डर के स्थान पर विश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया है।

रिपोर्ट: विकास सियारिया, जिला नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश

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