इंदौर में रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को भारतीय ज्ञान परंपरा में जैन दर्शन के योगदान पर केंद्रित राष्ट्रीय कुलगुरु सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। नेमी नगर जैन कॉलोनी स्थित घुंघट गार्डन में होने वाला यह सम्मेलन आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महामुनिराज के पावन सान्निध्य में आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में देशभर से करीब 25 से 30 कुलपति एवं विद्वानों के शामिल होने की संभावना है।
सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक प्रस्तावित सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं के साथ जैन दर्शन, साहित्य, संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में जैन परंपरा के योगदान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। विश्वविद्यालयों से जुड़े कुलगुरु, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और विभिन्न विषयों के विद्वान इस बौद्धिक संवाद में भाग लेंगे।
सम्मेलन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा में जैन दर्शन की भूमिका और उसके दार्शनिक एवं बौद्धिक योगदान को शैक्षणिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान समाज और शिक्षा व्यवस्था में जैन दर्शन के सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
आयोजकों के मुताबिक सम्मेलन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय चिंतन और आधुनिक शैक्षणिक विमर्श के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। जैन साहित्य और दर्शन में मौजूद ज्ञान परंपरा को विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और नई पीढ़ी तक किस प्रकार अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है, इस दिशा में भी विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय कुलगुरु सम्मेलन का आयोजन कुंदकुंद ज्ञानपीठ और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के सेंटर फॉर जैन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजन की व्यवस्थाओं में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के सहयोग की भी जानकारी दी गई है।
आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के सान्निध्य में होने वाला यह सम्मेलन जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों, साहित्यिक विरासत, आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय बौद्धिक परंपरा में उसके योगदान पर संवाद का मंच बनेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि सम्मेलन से विश्वविद्यालय जगत और जैन अध्ययन से जुड़े विद्वानों के बीच शैक्षणिक एवं शोधपरक सहयोग की नई संभावनाओं को भी दिशा मिलेगी।
संवाददाता: मुकेश कुमार जैन | NHP Bharat News, इंदौर