नई दिल्ली। देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर जारी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस्तीफे की जानकारी उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। अपने भावुक पत्र में उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें बेहद व्यथित किया है और वह नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी प्रकार की कानूनी या राजनीतिक जटिलताओं में उलझे।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय न बताते हुए कहा कि भारत की युवाशक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।
'युवाओं का भविष्य सर्वोपरि है'
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं। उनका हमेशा से विश्वास रहा है कि मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की नींव है।
उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के सपने, उनकी आकांक्षाएं और उनकी उम्मीदें हमेशा उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिलने पर उन्होंने आभार भी व्यक्त किया।
NEET-UG 2026 में अनियमितता स्वीकार की
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच CBI को सौंप दी।
सरकार ने परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया और भविष्य में परीक्षा को Computer Based Test (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की।
उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना थी। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
'पहले दिन से जिम्मेदारी ली'
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इससे पीछे नहीं हटे। उनका उद्देश्य था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2026 को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे और गरीब परिवारों के कई छात्रों ने भी सफलता हासिल की।
'राष्ट्र विरोधी ताकतें फायदा न उठाएं'
अपने इस्तीफे के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों में जो घटनाक्रम हुए, उन्हें देखकर उनका मन बेहद दुखी हुआ। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश में बनी स्थिति का कोई राष्ट्र विरोधी तत्व फायदा उठाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर सहित देशभर में जो आंदोलन और विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, उनका असर छात्रों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। देश का कोई भी विद्यार्थी कानूनी पेचीदगियों में न फंसे और वह अपनी पढ़ाई एवं करियर पर ध्यान केंद्रित कर सके, इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजा।
प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और भविष्य में भी वे देश, ओडिशा तथा युवाओं की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।
NEET विवाद: अब तक क्या-क्या हुआ?
- 3 मई 2026: देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा आयोजित हुई।
- 12 मई: पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द, दोबारा परीक्षा का निर्णय।
- 15 मई: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान टिप्पणी चर्चा में आई।
- 16 मई: सोशल मीडिया पर आंदोलन की शुरुआत।
- 6 जून: जंतर-मंतर पर पहला विरोध प्रदर्शन।
- 20 जून: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दूसरा प्रदर्शन।
- 28 जून: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे।
- 20 जुलाई: 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प।
- 21–23 जुलाई: संसद में विपक्ष ने NEET और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा लगातार उठाया।
- 24 जुलाई: NTA के 47 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
- 25 जुलाई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया।