Jehanabad

हुलासगंज सीएचसी में पैथोलॉजी जांच व्यवस्था पर सवाल, सुविधाएं होने के बावजूद मखदुमपुर भेजे जा रहे सैंपल

Nov 2, 2026
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मशीन, रसायन और कर्मचारी उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कई जांचें बंद, रिपोर्ट के लिए मरीजों को करना पड़ रहा दो दिन तक इंतजार

हुलासगंज (जहानाबाद, बिहार)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हुलासगंज में पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में जांच के लिए आवश्यक मशीनें, रसायन और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध होने के दावों के बावजूद कई महत्वपूर्ण जांचें स्थानीय स्तर पर नहीं की जा रही हैं। इसके बजाय मरीजों के सैंपल जांच के लिए मखदुमपुर भेजे जा रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण मरीजों को जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए दो दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद जांच सेवाओं का सीमित होना स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इस व्यवस्था से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पहले स्थानीय स्तर पर मिलती थी रिपोर्ट, अब बढ़ी परेशानी

स्थानीय मरीजों के अनुसार, पहले हुलासगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही अधिकांश आवश्यक पैथोलॉजी जांचें हो जाती थीं। मरीजों को सामान्यतः एक दिन के भीतर रिपोर्ट मिल जाती थी, जिससे वे चिकित्सक से परामर्श लेकर समय पर उपचार शुरू कर पाते थे।

लेकिन वर्तमान व्यवस्था में सैंपल मखदुमपुर भेजे जाने के कारण रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। मरीजों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के इंतजार में उन्हें दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। इससे समय और अतिरिक्त खर्च दोनों का बोझ बढ़ रहा है।

संसाधन मौजूद होने के बावजूद जांच क्यों नहीं?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर पैथोलॉजी जांच के लिए आवश्यक मशीनें, रसायन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बताई जा रही है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब अस्पताल में जांच की बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, तो रसायन आधारित जांचों के सैंपल दूसरे स्वास्थ्य केंद्र क्यों भेजे जा रहे हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि जांच सेवाओं को सीमित करने के पीछे प्रशासनिक अथवा तकनीकी कारण क्या हैं।

कोविड काल में बड़े स्तर पर होती थी जांच

स्थानीय लोगों ने बताया कि कोविड काल के दौरान हुलासगंज में पूरे जिले के सैंपलों की जांच की व्यवस्था संचालित थी। उस समय स्वास्थ्य केंद्र में बड़े स्तर पर जांच संबंधी कार्य किए जाते थे।

लोगों का सवाल है कि जब आपातकालीन परिस्थितियों में यहां व्यापक जांच व्यवस्था संचालित हो सकती थी, तो वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग स्थानीय मरीजों के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है?

कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि जांच का जिम्मा किसी एजेंसी को सौंपे जाने के बाद अस्पताल का पैथोलॉजी विभाग मुख्य रूप से सैंपल संग्रह तक सीमित हो गया है। हालांकि इस आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जनप्रतिनिधियों ने की जांच सेवा बहाल करने की मांग

पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई है।

मुखिया रंजीत कुमार, तीरा पंचायत के मुखिया अवधेश पंडित तथा कोकरसा की मुखिया राधा देवी सहित अन्य स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में जांच के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं, तो मरीजों को दूसरे स्वास्थ्य केंद्र की जांच व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने मांग की है कि हुलासगंज सीएचसी में स्थानीय स्तर पर पैथोलॉजी जांच सेवाओं को पुनः सुचारु किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल सके और उपचार में अनावश्यक देरी न हो।

प्रभारी बोले—विभागीय निर्देश के अनुसार भेजे जा रहे सैंपल

इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुलासगंज के प्रभारी चंद्रशेखर प्रकाश ने बताया कि विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन जांचों में रसायन की आवश्यकता होती है, उनके सैंपल मखदुमपुर भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना रसायन के होने वाली जांचें स्थानीय स्तर पर ही की जा रही हैं।

प्रभारी के इस बयान से स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य केंद्र में सभी पैथोलॉजी जांच सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं हैं, बल्कि रसायन आधारित जांचों के लिए अलग व्यवस्था लागू है।

पैथोलॉजी कर्मियों की जिम्मेदारी सैंपल संग्रह तक सीमित

दूसरी ओर, पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से मरीजों के सैंपल एकत्र करने तक सीमित रह गई है।

इस स्थिति ने अस्पताल में उपलब्ध जांच संसाधनों और कर्मचारियों के समुचित उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मरीजों के हित में व्यवस्था की समीक्षा जरूरी

हुलासगंज सीएचसी में पैथोलॉजी जांच को लेकर उत्पन्न स्थिति स्वास्थ्य विभाग के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है।

क्या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मशीनों और रसायनों का उपयोग किया जा सकता है? सैंपल मखदुमपुर भेजने की व्यवस्था से मरीजों को क्या लाभ मिल रहा है? और क्या रिपोर्ट उपलब्ध कराने की समयसीमा को कम किया जा सकता है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य मरीजों को समय पर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि जांच रिपोर्ट मिलने में लगातार देरी होती है, तो इसका सीधा असर मरीजों की उपचार प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मरीजों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है तथा हुलासगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Manoj Kumar
Author
Manoj Kumar
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