मोक्षभूमि गया जी में चल रहे विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान सनातन परंपरा की वैश्विक झलक देखने को मिली। फल्गु नदी के पावन तट स्थित देवघाट पर रूस, जर्मनी, इटली, लातविया और यूक्रेन से पहुंचे 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान एवं तर्पण किया।
विदेशी श्रद्धालु यहां केवल धार्मिक परंपराओं को देखने नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ सनातन रीति-रिवाजों को अपनाते हुए विधि-विधान से कर्मकांड में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भारतीय वेशभूषा में विदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान करते देख देवघाट पर मौजूद लोगों के लिए भी यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बन गया।
साड़ी और धोती-कुर्ते में किया कर्मकांड
22 विदेशी श्रद्धालुओं के समूह में इटली के 58 वर्षीय बोराची मैसीमो अकेले पुरुष श्रद्धालु रहे, जबकि समूह में शामिल अन्य सभी महिलाएं थीं। महिलाओं ने भारतीय साड़ी पहनकर और पुरुष श्रद्धालु ने धोती-कुर्ता धारण कर धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया।
श्रद्धालुओं ने उपवास रखते हुए सनातन परंपरा के अनुसार तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। वैदिक मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच उनके चेहरे पर श्रद्धा और भावुकता साफ दिखाई दी।
फल्गु तट पर विधि-विधान से हुआ पिंडदान
धर्म प्रचारक लोकनाथ गौड़ दास के मार्गदर्शन में विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर पिंडदान किया। इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की गई।
गया जी में विदेशों से आए श्रद्धालुओं का सनातन परंपरा से इस तरह जुड़ना पितृपक्ष मेले की एक अलग और खास तस्वीर पेश कर रहा है। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि गया जी की सदियों पुरानी पिंडदान परंपरा की वैश्विक पहचान को भी दर्शाता नजर आया।
पितृपक्ष मेले के दौरान देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं का पिंडदान प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना रहा।